शहद के साथ चीनी
एक गाँव में एक गरीब लेकिन ईमानदार मधुमक्खी‑मिस्त्री रहता था, जो शहद और चीनी से बने मीठे पेस्ट बनाकर बेचता था। वह हमेशा साफ‑सफाई और सच्चाई पर ध्यान देता था। गाँव के लोग उसका शहद‑पेस्ट बहुत पसंद करते थे, क्योंकि वह बिना किसी मिलावट के मीठा और स्वादिष्ट होता था।
लालच का जन्म
एक दिन उसका दुकानदार दोस्त बोला, “तुम इतनी मेहनत करके कम क्यों कमाते हो? थोड़ी चीनी और सस्ता सिरप मिला दो, तो लागत कम होगी और कमाई ज़्यादा।”
गरीबी और लालच के दबाव में वह मान गया और अपने शहद‑पेस्ट में चीनी व शुगर‑सिरप मिलाना शुरू कर दिया। शुरू में लोगों को कुछ अंतर लगा नहीं, लेकिन बाद में उन्हें लगने लगा कि स्वाद फीका‑फीका हो गया है और पेट भी खराब हो रहा है।
सच्चाई उजागर
गाँव के बुज़ुर्ग चिकित्सक ने उसका शहद‑पेस्ट लेकर जाँच की और बोले, “यह सच्चा शहद नहीं है, बल्कि चीनी और सस्ते सिरप का मिश्रण है।”
गाँव वाले गुस्से में आए और बोले: “हमें मीठास चाहिए, धोखा नहीं। हमें सच्चा शहद चाहिए, चाहे वह महँगा क्यों न हो!”
मधुमक्खी‑मिस्त्री शर्म से सिर झुका लिया। उसने सबके सामने वादा किया कि अब वह कभी शहद में मिलावट नहीं करेगा। उसने फिर से साफ और असली शहद से बना पेस्ट बेचना शुरू किय막ा। धीरे‑धीरे गाँव वालों ने उस पर फिर से भरोसा करना शुरू कर दिया।
ईमानदारी का फल
एक दिन राज्य का राजा भी उसके पास आया और शहद‑पेस्ट खाकर बहुत खुश हुआ। उसने उसे राजदरबार का अधिकृत शहद‑आपूर्तिकर्ता बना दिया। अब उसकी दुकान न केवल गाँव में, बल्कि राज्य में भी मशहूर हो गई।
उसने जान लिया कि ईमानदारी और शुद्धता से बना शहद‑पेस्ट ही सबसे असली और सबसे मीठा होता है।