बूट पहनने वाला बिल्ला

एक किसान के तीन बेटे थे। जब वह मर गया तो बड़े बेटे को चक्की, दूसरे को गधा और सबसे छोटे बेटे मार्की को सिर्फ एक बिल्ला मिली। मार्की सोचने लगा कि अब वह गरीब ही रहेगा।

बिल्ला की चालाकी

लेकिन बिल्ला एक साधारण बिल्ला नहीं थी। उसने मार्की से कहा, “अपने पास थोड़े पैसे लेकर मुझे एक जोड़ी छोटे जूते और एक थैला लाओ।”

मार्की ने ऐसा ही किया। बिल्ला ने जूते पहने और थैला लेकर कहा, “अब तुम घर बैठे रहो, मैं तुम्हारे लिए भाग्य बनाऊँगी।”

राजा को शिकार

बिल्ला जंगल में गई और शिकार करके खरगोश, पक्षी और अन्य जानवर पकड़ी। फिर वह राजा के रथ के पास जाकर चिल्लाई, “यशवंत, महाराज! मेरा मालिक मार्की, मार्की ऑफ काबूस, आपके लिए यह शिकार भेज रहे हैं!”

राजा खुश हुआ और हर बार शिकार लेता रहा। इस तरह कई महीनों तक बिल्ला ने राजा को यह गलत धारणा दिलाई कि मार्की एक धनी और नामी राजकुमार है।

राजकुमारी से मिलाप

एक दिन राजा अपनी राजकुमारी के साथ सैर करने निकला। बिल्ला ने मार्की से कहा, “अपने कपड़े उतारकर नदी में नहा जाओ।”

जब राजा वहाँ गुज़रा तो बिल्ला रोती हुई बोली, “महाराज! आप देखिए, मेरे मालिक मार्की को चोरों ने नहाते‑समय कपड़े छीन लिए हैं!”

राजा ने नंगे मार्की के लिए महल के कपड़े भेजे, उसे रथ में बैठाया और राजकुमारी को उससे बात करने दी। राजकुमारी मार्की से बहुत प्रभावित हुई।

राक्षस की ज़मीन

अगले दिन बिल्ला ने राजा को एक बड़ी ज़मीन दिखाई और बोली, “यह सब मार्की की जमीन है, जो दुष्ट राक्षस ने जबरन कब्ज़ कर ली थी।”

बिल्ला ने राक्षस को एक‑एक करके बदलते रूप में डराया और उसे अपने राज्य के बारे में झूठ बताया। आखिरकार राक्षस घबराकर भाग गया। राजा ने उस ज़मीन पर अपनी मुहर लगवा दी।

राजा ने सोचा: “इतनी बड़ी ज़मीन और इतनी बड़ी विनम्रता वाला राजकुमार, यह तो मेरी बेटी के लायक है।”

अंत में राजा ने मार्की की शादी अपनी बेटी से कर दी और उसे राजकुमार बना दिया।

बिल्ला ने सिर्फ बूट पहनकर अपने गरीब मालिक मार्की का जीवन पूरी तरह बदल दिया।

नैतिक शिक्षा: बुद्धि और चतुरता से कमज़ोर व्यक्ति भी ऊँचा उठ सकता है, लेकिन झूठ और छल का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि यह अपने‑आप में खतरनाक हो सकता है।