Greedy King
Post Date: 2024-11-06 21:43:47 | Last Updated: 2026-05-06 22:54:38
Category: Sarkari Anjaam | Subcategory: MP Important link
लालची राजा – नैतिक कहानी
एक देश में एक लालची राजा रहता था। वह इतना लालची था कि प्रजा से वह खाना भी ले लेता था जो उसे पसंद नहीं था। इसलिए वहाँ के लोग हमेशा भूखे और गरीब रहते थे।
भोज और लालच
एक सुबह फिर एक अद्भुत भोज तैयार किया गया। मेज पर सब कुछ रखा था, लेकिन राजा को केवल खाना आता था, शेयर करना उसे बिल्कुल पसंद नहीं था। उसकी बेटी राजकुमारी लीला उसे समझा रही थी कि जो उसने किया वह गलत था।
“बिल्कुल नहीं! मैं नहीं कर सकता! यह सब मेरा है! मैं यह सब खाऊँगा!” राजा चिल्लाया।
राजा इतनी तेजी से खाने लगा कि खाते‑खाते उसके मुँह से भोजन के टुकड़े बाहर आ रहे थे। लालच के कारण पेट भरने के बाद भी वह खाता रहा, और उस रात वह बहुत बीमार पड़ गया।
वैद्य और लकड़हारा
राजा के वैद्य को बुलाया गया, लेकिन दवाओं से भी राजा ठीक नहीं हो रहा था। राजकुमारी लीला को एक गाँव याद आया, जहाँ एक लकड़हारा हर बीमारी का इलाज जानता था। उस रात लीला अपने घोड़े पर सवार होकर उस गाँव की ओर चल पड़ी।
रास्ते में उसे भूखे बच्चे, भूखे जानवर और बिना जलाऊ लकड़ी व कपड़ों वाले घर दिखे। नेकदिल लीला तुरंत महल लौटी, पिता सोने पर उसने सारा सोना लिया और जरूरतमंदों में बाँट दिया। लोगों को खाना मिला और उनके घर गर्म हो गए।
लकड़हारे की शर्त
लीला जब लकड़हारे के पास पहुँची तो उसने एक दवा की बोतल दी और कहा:
“इसे राजा को दो। एक घूँट में पीने से वह तुरंत ठीक हो जाएगा, लेकिन मेरी एक शर्त है। तुम्हारे पिता यहाँ मेरे साथ पचास वर्ष रहेंगे। तुम देश पर शासन करोगी। पचास वर्ष बाद आकर उन्हें ले जाना।”
असहाय लीला ने उस शर्त को स्वीकार कर लिया क्योंकि वह चाहती थी कि पिता जीवित रहें। राजा को दवा पिलाने के बाद वह ठीक हो गया, लेकिन लीला ने शर्त पूरी नहीं की, इसलिए राजा फिर से बीमार हुआ। डरकर लीला ने शर्त मान ली और राजा को लकड़हारे के पास भेज दिया।
पचास वर्ष और बदलाव
साल बीत गए और लीला का देश खुश और समृद्ध हो गया। जब पचास वर्ष पूरे हुए तो राजकुमारी अपने पिता से मिलने गई। जब उसने उन्हें पहली बार देखा तो पहचान नहीं पाई, क्योंकि राजा अब बूढ़े नहीं बल्कि युवा और छोटे दिख रहे थे।
“यह कैसे हुआ, पिताजी?” लीला ने पूछा।
राजा ने मुस्कुराते हुए कहा: “मैंने जीवनभर लालच किया था। यहाँ आकर मैंने साझा करना सीखा। अच्छी भावनाओं ने मुझे अंदर से सुंदर और युवा बना दिया।”
लकड़हारे ने अपना वादा निभाया और राजा को देश लौटने दिया। अब देश में सभी खुश थे और चाहते थे कि राजा फिर से शासन करे, क्योंकि अब वे उसे प्यार करते थे।